उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yar hai tu jis ko samjha ghair hai

यार है तू जिस को समझा ग़ैर है

یار ہے تو جس کو سمجھا غیر ہے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यार है तू जिस को समझा ग़ैर है
ग़ैर अपना कौन अपना ग़ैर है

ग़ैर का अहवाल सुनते हैं वो ख़ूब
इस लिए अहवाल मेरा ग़ैर है

है तिरी तेग़-ए-निगह में क्या असर
वार हो हम पर तो कटता ग़ैर है

ग़ैर समझा है यहाँ तक हम को यार
बोसा माँगें हम तो पाता ग़ैर है

अगले यारों में तुम्हारे था 'नसीम'
आज समझे हम कि अगला ग़ैर है