उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-ruKH hai wo pari dil-e-diwana kya kare

बे-रुख़ है वो परी दिल-ए-दीवाना क्या करे

بے رخ ہے وہ پری دل دیوانہ کیا کرے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-रुख़ है वो परी दिल-ए-दीवाना क्या करे
रो रो के आँख भरती है पैमाना क्या करे

दस्त-ओ-ज़बान-ओ-दीदा-ओ-दिल देती हैं दुआ
करते हैं वो यगाने कि बेगाना क्या करे

कहता ही मुर्ग़-ए-दिल से वो हाल-ए-म्यान-ए-ख़त
सब्ज़ा जो दाम हो तो उसे दाना क्या करे

बेबस किया है मुझ को सर-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार ने
ज़ंजीर पाँव में हो तो दीवाना क्या करे

जादू है आँख सुर्मा न क्यूँ-कर रहे ख़मोश
सरकश ही ज़ुल्फ़ काँधे न दे शाना क्या करे

दिल को न दाग़ दीजिए बोसे की चाट पर
जो बेचता न होवे वो बैआ'ना क्या करे