उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman mein dahr ke aa kar main kya nihaal hua

चमन में दहर के आ कर मैं क्या निहाल हुआ

چمن میں دہر کے آ کر میں کیا نہال ہوا

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन में दहर के आ कर मैं क्या निहाल हुआ
ब-रंग-ए-सब्ज़ा-ए-बेगाना पाएमाल हुआ

कहानी कह के सुलाते थे यार को सो अब
फ़साना उम्र हुई ख़्वाब वो ख़याल हुआ

जुनूँ की चाक-ज़नी ने असर किया वाँ भी
जो ख़त में हाल लिखा था वो ख़त का हाल हुआ

'नसीम' दुज़दी-ए-मज़मूँ न छोड़ेंगे शोअरा
अगरचे शहर का तब्दील कोतवाल हुआ