उर्दू शायरी · ग़ज़ल

buton ki agar KHud-numai na dekhun

बुतों की अगर ख़ुद-नुमाई न देखूँ

بتوں کی اگر خود نمائی نہ دیکھوں

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बुतों की अगर ख़ुद-नुमाई न देखूँ
इन आँखों से यारब ख़ुदाई न देखूँ

मोहब्बत से कहता हूँ सी रक्खूँ आँखें
पलक से पलक की जुदाई न देखूँ

भला मैं बुरा जानता हूँ जो तुम को
बुराई है अपनी भलाई न देखूँ

मिरा अक्स तक साफ़ मुझ से नहीं है
मैं हैराँ हूँ किस मुँह से आईना देखूँ

'नसीम' उस चमन के जो काँटों से उलझूँ
मैं उस गुल की रंगीं-अदाई न देखूँ