उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baalin pe ho ai jaan jo ranai se guzre

बालीं पे हो ऐ जान जो रानाई से गुज़रे

بالیں پہ ہو اے جان جو رعنائی سے گزرے

शायर: Pandit Daya Shankar Naseem Lakhnawi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बालीं पे हो ऐ जान जो रानाई से गुज़रे
मुर्दा मिरा देखे जो मसीहाई से गुज़रे

ग़म मरने का अपने तो न था गोर में जाकर
अंदेशे हज़ारों तिरी रानाई से गुज़रे

दीवाने से पुर्सिश है न वीराने से हासिल
नादानी में क्यों होए तू दानाई से गुज़रे

भरिये वहीं तक जिस में न छलके मिरे साहिब
इस तरह की हम लाफ़-शकेबाई से गुज़रे

कहते थे वो कल सुन के 'नसीम' आप का चर्चा
अक्सर हैं इधर से भी वो सौदाई से गुज़रे