उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaadon ko dhuan kar ke uDa kyon nahin dete

यादों को धुआँ कर के उड़ा क्यों नहीं देते

یادوں کو دھواں کر کے اڑا کیوں نہیں دیتے

शायर: Hafeez Banarasi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यादों को धुआँ कर के उड़ा क्यों नहीं देते
ताक़त है तो तुम मुझ को भुला क्यों नहीं देते

तुम मुझ को ख़ताओं की सज़ा क्यों नहीं देते
इस 'अह्द में जीने की दु'आ क्यों नहीं देते

घनघोर अंधेरा है अगर मद्द-ए-मुक़ाबिल
पर्दा रुख़-ए-रौशन से उठा क्यों नहीं देते

नाक़िस जिन्हें लगता है हर इक शे'र तुम्हारा
तुम उन की ग़ज़ल उन को सुना क्यों नहीं देते

कहती है सख़ी-इब्न-ए-सख़ी आप को दुनिया
फिर आप मुझे हक़ भी मिरा क्यों नहीं देते

दरिया की ख़मोशी अगर अच्छी नहीं लगती
पानी में कोई चीज़ गिरा क्यों नहीं देते

सज्दा तो सभी करते हैं रस्मों के बुतों को
सर तुम भी 'हबीब' अपना झुका क्यों नहीं देते