उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad rakhne se bhul jaane se

याद रखने से भूल जाने से

یاد رکھنے سے بھول جانے سے

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद रखने से भूल जाने से
कट गए दिन किसी बहाने से

मैं सरापा हुआ धनक सूरत
तेरे कुछ-कुछ क़रीब आने से

घर में भूचाल आ गया होता
सिर्फ़ दरवाज़ा खटखटाने से

अब तो इतना ही याद आता है
कोई शिकवा सा था ज़माने से

कुल बग़ीचा ही बन गया नग़्मा
एक पंछी के चहचहाने से