उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chand alfaz kuchh ahwal bacha rakhe hain

चंद अल्फ़ाज़ कुछ अहवाल बचा रखे हैं

چند الفاظ کچھ احوال بچا رکھے ہیں

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चंद अल्फ़ाज़ कुछ अहवाल बचा रखे हैं
हम ने दो एक ही आ'माल बचा रखे हैं

पहले गाते थे बजाते थे हवाओं के मिज़ाज
अब तो टूटे हुए सुर-ताल बचा रखे हैं

उड़ गए हुस्न-ओ-जवानी के परिंदे कब के
हाँ तसव्वुर में ख़द-ओ-ख़ाल बचा रखे हैं

बैठा करता था कभी आ के जो ताइर उस के
इक दरीचे ने पर-ओ-बाल बचा रखे हैं

एक नादीदा सनम भी है कहीं तेरे सिवा
उस की ख़ातिर ये मह-ओ-साल बचा रखे हैं