उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzar gaya jo nazar se nazar ka hissa hai

गुज़र गया जो नज़र से नज़र का हिस्सा है

گزر گیا جو نظر سے نظر کا حصہ ہے

शायर: Om Prabhakar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़र गया जो नज़र से नज़र का हिस्सा है
शजर से उड़ता परिंदा शजर का हिस्सा है

तुम्हारा दर्द अगर दर्द-ए-ना-रसाई है
तुम्हारा दर्द हमारे जिगर का हिस्सा है

न वो तुम्हारे यहाँ है न वो हमारे यहाँ
उदास चूल्हा कहो किस के घर का हिस्सा है

जहाँ के लोग ख़ुदा के करम पे ज़िंदा हैं
इलाक़ा वो भी हमारे नगर का हिस्सा है

सफ़र सफ़र है सफ़र में पड़ाव क्या मा'नी
तिरा वजूद तिरी रहगुज़र का हिस्सा है

बना रहे जो हमेशा वो घर बना ही नहीं
मकाँ तुम्हारा तुम्हारे सफ़र का हिस्सा है