उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari KHalwaton ki dhun dar-o-diwar sunte hain

हमारी ख़ल्वतों की धुन दर-ओ-दीवार सुनते हैं

ہماری خلوتوں کی دھن در و دیوار سنتے ہیں

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी ख़ल्वतों की धुन दर-ओ-दीवार सुनते हैं
चमन के रंग-ओ-बू की बंदिशों को ख़ार सुनते हैं

हवा सरगोशियाँ करती है जो चिड़ियों के कानों में
उसे उड़ते हुए रंगीन गुल पर-दार सुनते हैं

हवाएँ हादसों के जो इशारे ले के आती हैं
उन्हें हम अनसुना कर दें मगर अश्जार सुनते हैं

सभी सुनते हैं घर में सिर्फ़ अपनी-अपनी दिलचस्पी
धँसकते बाम-ओ-दर की सिसकियाँ मे'मार सुनते हैं

ज़बाँ जो दिल में रहती है कभी लब पर नहीं आती
उसे कोई नहीं सुनता मगर फ़नकार सुनते हैं