उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhula-bisra waqt phir mehman hai

भूला-बिसरा वक़्त फिर मेहमान है

بھولا بسرا وقت پھر مہمان ہے

शायर: Om Prabhakar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भूला-बिसरा वक़्त फिर मेहमान है
फिर वही आँगन वही दालान है

एक कमरा है कहीं जिस में निहाँ
मेरे बचपन का सर-ओ-सामान है

बुत-कदे में जो भी है पत्थर का है
और पत्थर का ख़ुदा इंसान है

बे-तरह मुश्किल है तुझ को देखना
सोचना लेकिन बड़ा आसान है

जल उठा क्यूँ-कर मिरे दिल का चराग़
जब कि सालों से ये घर वीरान है

कब तुझे भूला नहीं याद आ रहा
हाँ तिरे होने का मुझ को ध्यान है