उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan chhu ke dekhun wahin par KHala hai

जहाँ छू के देखूँ वहीं पर ख़ला है

جہاں چھو کے دیکھوں وہیں پر خلا ہے

शायर: Om Prabhakar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ छू के देखूँ वहीं पर ख़ला है
हवा में हवा के सिवा और क्या है

तिरे बा'द ये हाल है शह्र-ए-दिल का
न बारिश न तूफ़ाँ न बाद-ए-सबा है

लिखा है जो नज़रों ने लौह-ए-नज़र पर
वो दिल के सिवा और किस ने पढ़ा है

धंसकने लगा है वो कमरा कि जिस में
परिंदों का छोड़ा हुआ घोंसला है

खुला है कहीं इक दरीचा अभी भी
कि जिस में कोई ख़ूबसूरत खड़ा है

मिरा दर्द मेरा है उस का उसी का
तो क्यों ग़म-गुसारी का ये सिलसिला है