उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDha jo hath to diwar bich mein aai

बढ़ा जो हाथ तो दीवार बीच में आई

بڑھا جو ہاتھ تو دیوار بیچ میں آئی

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बढ़ा जो हाथ तो दीवार बीच में आई
उठी निगाह तो मीनार बीच में आई

सफ़र सभी का मुअ'य्यन है एक ही दर तक
तो किस सबब से ये रफ़्तार बीच में आई

हिसार-ए-फ़र्क़ कभी का सिमट गया होता
कभी अना कभी दस्तार बीच में आई

समझना सोचना सुनना जहाँ नहीं मुमकिन
कहाँ से इश्क़ में गुफ़्तार बीच में आई

दर-ए-बहिश्त रहा दो क़दम कि लौट आया
वतन की सूरत-ए-लाचार बीच में आई