उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad ayyam-e-rafta yun aae

याद अय्याम-ए-रफ़्ता यूँ आए

یاد ایام رفتہ یوں آئے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb14 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

याद अय्याम-ए-रफ़्ता यूँ आए
धुँदले धुँदले से जैसे कुछ साए

जैसे उड़ते हुए परिंदे का
नग़्मा दम भर फ़ज़ा में लहराए

जैसे वीरान दिल के गुलशन में
चुपके चुपके बहार आ जाए

सूनी सूनी सी जैसे महफ़िल में
दफ़अ'तन जान-ए-इंतिज़ार आए

जैसे अब्र-ए-सियह के पर्दे में
चाँद की इक किरन थिरक जाए

जैसे सुनसान रहगुज़ारों में
यक-ब-यक इक चराग़ जल जाए

या कोई रिंद-ए-तिश्ना-लब जैसे
दस्त-ए-साक़ी से जाम पा जाए

जैसे महजूर एक ग़ज़ल गा कर
अपने ग़मगीन दिल को बहलाए

जैसे तारीक शब का सन्नाटा
नग़्मा-ए-लय से टूटता जाए

एक तूफ़ाँ-ज़दा मुसाफ़िर के
जैसे साहिल क़रीब आ जाए

जैसे तपते से रेगज़ारों में
अब्र-ए-रहमत ज़रा बरस जाए

जैसे पहली किरन सवेरे की
रौज़न-ए-शब से झाँकती जाए

जैसे बाद-ए-सबा के झोंकों से
ग़म के मारों को नींद आ जाए

जैसे ग़ुर्बत में भटके राही को
इक पयाम-ए-'हबीब' आ जाए