उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo tere gham ko pahchane nahin hain

वो तेरे ग़म को पहचाने नहीं हैं

وہ تیرے غم کو پہچانے نہیں ہیں

शायर: Daur Afridi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो तेरे ग़म को पहचाने नहीं हैं
अभी अपनों में बेगाने नहीं हैं

हज़ारों महफ़िलें ऐसी हैं जिन में
हमारे ग़म के अफ़्साने नहीं हैं

जो भर जाएँ वो पैमाने ही समझो
जो ख़ाली हैं वो पैमाने नहीं हैं

तिरे कूचे की रौनक़ है हमीं से
तिरे कूचे में दीवाने नहीं हैं

ज़रा बन-ठन तो ले ऐ ज़िंदगानी
बराए-हुस्न वीराने नहीं हैं

जहान-ए-दिलरुबाई अल्लाह अल्लाह
जहाँ तुम हो तो फ़रज़ाने नहीं हैं

वहाँ ही तल्ख़ियाँ पीता रहा हूँ
जहाँ ऐ 'दौर' मयख़ाने नहीं हैं