उर्दू शायरी · ग़ज़ल

in ke aariz pe ashkon ke dhaare

इन के आरिज़ पे अश्कों के धारे

ان کے عارض پہ اشکوں کے دھارے

शायर: Daur Afridi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इन के आरिज़ पे अश्कों के धारे
जैसे फूलों को शबनम सँवारे

ग़म न कर इस जहान-ए-तलब में
टूट जाते हैं अक्सर सहारे

तुम ने मंतिक़ से उल्फ़त को समझा
तुम ही जीते चलो हम ही हारे

ग़म की ज़हमत में क्या कुछ न बीती
रात काटी है गिन गिन के तारे

छोड़ कर मुझ को बहर-ए-अलम में
तेरी कश्ती गई है किनारे

इस को फ़ख़्र-ए-मोहब्बत न क्यों हो
'दौर' दिल में रहा है तुम्हारे