उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHizan ka zikr na zikr-e-bahaar karte rahe

ख़िज़ाँ का ज़िक्र न ज़िक्र-ए-बहार करते रहे

خزاں کا ذکر نہ ذکر بہار کرتے رہے

शायर: Daur Afridi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़िज़ाँ का ज़िक्र न ज़िक्र-ए-बहार करते रहे
तुझी को तेरी निगाहों से प्यार करते रहे

मता-ए-दर्द कि बढ़ती रही न जाने क्यों
इलाज-ए-दर्द मिरे ग़म-गुसार करते रहे

दयार-ए-हुस्न के जल्वे थे ख़ूब-तर लेकिन
मिरी नज़र के लिए इंतिज़ार करते रहे

मुझे तो रक़्स-ए-मसाइब भी रास आ न सके
वो बज़्म-हा-ए-सुरूद-ओ-सितार करते रहे

कभी यक़ीन-ए-मोहब्बत न था न है लेकिन
फ़रेब-ख़ुर्दा तिरा ए'तिबार करते रहे