उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jahan un ko un ke ishaaron ko dekha

जहाँ उन को उन के इशारों को देखा

جہاں ان کو ان کے اشاروں کو دیکھا

शायर: Daur Afridi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जहाँ उन को उन के इशारों को देखा
वहीं दिल की साज़िश के मारों को देखा

मैं कुछ बे-तुकी बातें बातें सुना दूँ
तड़पते हुए आबशारों को देखा

सितारे भी सोने लगे वो न आए
ख़िलाफ़-ए-तमन्ना सहारों को देखा

भँवर के फ़साने सुनाता रहा हूँ
न साहिल को देखा न धारों को देखा

जहाँ ख़ुद को देखा ख़िज़ाँ ही ख़िज़ाँ है
जहाँ उन को देखा बहारों को देखा

किया एहतिजाज इस ज़माने ने उस का
किसी धुन में जब बे-क़रारों को देखा

ये छुप-छुप के यकजा पिएँ 'दौर'-ओ-ज़ाहिद
किसी ने भी इन शाहकारों को देखा