उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo sitamgar jidhar gaya hoga

वो सितमगर जिधर गया होगा

وہ ستم گر جدھر گیا ہوگا

शायर: G R Kanwal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो सितमगर जिधर गया होगा
इक ज़माना उधर गया होगा

आने वाला ज़मीं पे आता था
जाने वाला किधर गया होगा

गाहे-गाहे तो ख़ुद समुंदर भी
अपनी लहरों से डर गया होगा

चारागर बे-सबब नहीं रोता
कोई बीमार मर गया होगा

जिस पे ग़म की नज़र पड़ी होगी
उस का चेहरा निखर गया होगा

दिल जो बिगड़ा हुआ था मुद्दत से
चोट खा कर सँवर गया होगा

मेरा दुश्मन 'कँवल' पस-ए-पर्दा
जो भी करना था कर गया होगा