उर्दू शायरी · ग़ज़ल

asir-e-ab-o-gil ko ek din aazad hona tha

असीर-ए-आब-ओ-गिल को एक दिन आज़ाद होना था

اسیر آب و گل کو ایک دن آزاد ہونا تھا

शायर: G R Kanwal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

असीर-ए-आब-ओ-गिल को एक दिन आज़ाद होना था
नई दुनिया में जाना था वहाँ आबाद होना था

मोहब्बत करने वालो जा रहे हो अब कहाँ मरने
जहाँ दिल को लगाया था वहीं बर्बाद होना था

ख़ुशी मिलती कहाँ से जब ब-नाम-ए-गर्दिश-ए-दौराँ
उसे नाशाद करना था मुझे नाशाद होना था

ये अपनी ख़ुश-नसीबी थी कि हम पहले चले आए
सितम जो उस को ढाना था अभी ईजाद होना था

'कँवल' शहर-ए-निगाराँ में था इतना होश कब दिल को
कहाँ रहना था बंदिश में कहाँ आज़ाद होना था