उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-o-dimagh mein Dhalte rahe sawal bahut

दिल-ओ-दिमाग़ में ढलते रहे सवाल बहुत

دل و دماغ میں ڈھلتے رہے سوال بہت

शायर: G R Kanwal8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ओ-दिमाग़ में ढलते रहे सवाल बहुत
ग़ज़ब की आग थी जलते रहे सवाल बहुत

जवाब मिलने की सूरत न थी कोई लेकिन
हर एक लब से निकलते रहे सवाल बहुत

निगाह-ए-हुस्न से आया न जब जवाब कोई
निगाह-ए-'इश्क़ में पलते रहे सवाल बहुत

वो जिस के पास ज़ख़ीरा था सब जवाबों का
उसी की बज़्म में टलते रहे सवाल बहुत

ख़ुदा ने बख़्शी थी मुझ को कमाल की गर्मी
मिरे लहू में पिघलते रहे सवाल बहुत

सफ़र तमाम हुआ रुक गए क़दम फिर भी
रह-ए-हयात में चलते रहे सवाल बहुत

अगरचे मिल गई आख़िर किसी समुंदर में
नदी के दिल में सुलगते रहे सवाल बहुत

उसी के दम से 'कँवल' ज़िंदगी में रौनक़ थी
वो जिस के दम से मचलते रहे सवाल बहुत