उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo sang-dil to faqat dekhne se Tut gae

वो संग-दिल तो फ़क़त देखने से टूट गए

وہ سنگ دل تو فقط دیکھنے سے ٹوٹ گئے

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो संग-दिल तो फ़क़त देखने से टूट गए
ये देखने में हमारे पसीने छूट गए

उन्हें हमारे सिवा क़ाफ़िले से कुछ न मिला
मगर लुटेरे हमारा भरम तो लूट गए

तुम्हारी दीद का दरवाज़ा खटखटाया ज़रूर
मैं क्या करूँ कि निगाहों के हाथ टूट गए

तुम्हारे दश्त से कुछ ख़ास हाथ आया नहीं
ज़रा से आबले लाए थे वो भी फूट गए

न खाईं ठोकरें उस की गली के पत्थरों से
गुज़रने वालो तुम्हारे नसीब फूट गए