उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil kisi ka na hua ek KHaridar ke baad

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बा'द

دل کسی کا نہ ہوا ایک خریدار کے بعد

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल किसी का न हुआ एक ख़रीदार के बा'द
लोग बाज़ार लगा लेते हैं बाज़ार के बा'द

क़त्ल कर के भी हमें दिल नहीं भरता उन का
लात भी मारते हैं जिस्म पे तलवार के बा'द

ख़ुद को बद-बख़्त कहूँ या मैं कहूँ ख़ुश-क़िस्मत
मेरी बीनाई गई है तिरे दीदार के बा'द

शहर ख़ाली न हो ये सोच के हम ख़ाना-ब-दोश
जम' हो जाते हैं हर रात को बाज़ार के बा'द

सिर्फ़ पछतावा हुआ है हमें तुझ से मिल कर
कभी गुफ़्तार से पहले कभी गुफ़्तार के बा'द