उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hakim-e-shahr ke andaz hain hinda jaise

हाकिम-ए-शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे

حاکم شہر کے انداز ہیں ہندہ جیسے

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हाकिम-ए-शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे
हम तो हाथों में थमा देंगे कलेजा जैसे

सख़्त मुश्किल था मुझे छोड़ के आना तुझ को
सुकड़ी गलियों से निकलता है जनाज़ा जैसे

यूँ दिलाया है उसे अपनी मोहब्बत का यक़ीन
मुंकिर-ए-दीं को पढ़ाया गया कलमा जैसे

उस का झुँझलाना तो बनता था कि मैं ने उस को
ऐसे देखा कभी देखा ही नहीं था जैसे

ज़िंदगी साथ तिरे इतनी हसीं लगती है
धूप में बैठा हुआ दूध-मुँह बच्चा जैसे

ज़िंदगी घूम रही है तिरी यादें ले कर
मौत के घर में टहलती हुई बेवा जैसे