उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo samne hon aur nazar ko KHabar na ho

वो सामने हों और नज़र को ख़बर न हो

وہ سامنے ہوں اور نظر کو خبر نہ ہو

शायर: Damodar Thakur Zaki9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो सामने हों और नज़र को ख़बर न हो
बर्बाद इस क़दर भी शुऊर-ए-नज़र न हो

तुझ से इलाज अगर न हो ऐ चारागर न हो
राज़-ए-ग़म-ए-मरीज़ मगर दर-ब-दर न हो

आँखें बिछी हुई हैं बहुत दूर दूर तक
मुमकिन नहीं कि आप की ये रहगुज़र न हो

मुझ पर बरस पड़े न कहीं बरहमी-ए-ज़ुल्फ़
जो तेरे सर बला है मिरे दिल के सर न हो

तुझ से ही मेरे जज़्बा-ए-उल्फ़त में जान है
ऐ ज़िंदगी हयात तिरी मुख़्तसर न हो

है वुसअ'त-ए-निगाह को कुछ और जुस्तुजू
ऐ हद्द-ए-काएनात तू हद्द-ए-नज़र न हो

राह-ए-वफ़ा का लुत्फ़ भी कुछ चल के देखिए
इस रहगुज़र पे आप का शायद गुज़र न हो

जज़्बात-ए-दिल को लाख छुपाते हो तुम मगर
इस बज़्म में कहीं कोई अहल-ए-नज़र न हो

क्या हो गया है तुझ को ख़ुदा जाने ऐ 'ज़की'
दिल में कोई हो और नज़र को ख़बर न हो