उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nazar ban kar tajalli jalwa-gar hai

नज़र बन कर तजल्ली जल्वा-गर है

نظر بن کر تجلی جلوہ گر ہے

शायर: Damodar Thakur Zaki11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नज़र बन कर तजल्ली जल्वा-गर है
जहाँ बे-साख़्ता सज्दे में सर है

ये किस से खेल ऐ दिल कुछ ख़बर है
नज़र है ये हसीनों की नज़र है

वो आते हैं तो आएँ उन का घर है
ज़हे-तक़दीर क्या अच्छी ख़बर है

किसी का हर-नफ़स दिल में गुज़र है
मगर आँखों को क्या इस की ख़बर है

ज़रा भी सह नहीं सकते जिसे तुम
वो कैफ़िय्यत हमारी उम्र भर है

फिर आगे क्या हुआ साक़ी ही जाने
नज़र मुझ पर पड़ी इतनी ख़बर है

क़यामत में निशानी ज़िंदगी की
मेरी तर-दामनी है चश्म-ए-तर है

वो क्या जाने किसी के दिल की हालत
जो अपने हाल ही से बे-ख़बर है

क़दम उठते नहीं दिल बैठता है
ख़ुदा जाने ये किस की रहगुज़र है

वो गेसू खोल कर आए चमन में
सबा लाई है और उड़ती ख़बर है

जुदा हैं ऐ 'ज़की' वो जीने वाले
मगर जीने का इल्ज़ाम अपने सर है