उर्दू शायरी · ग़ज़ल

le liya wada un ke aane ka

ले लिया वा'दा उन के आने का

لے لیا وعدہ ان کے آنے کا

शायर: Damodar Thakur Zaki15 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ले लिया वा'दा उन के आने का
अब मुक़द्दर ग़रीब-ख़ाने का

खुल गया राज़ मुस्कुराने का
तुम को नुक्ता मिला बहाने का

रोज़ ही इंक़लाब आते हैं
क्या भरोसा किसी ज़माने का

एक सय्याद एक मैं इक बर्क़
सब को अरमाँ है आशियाने का

दिल में भी कुछ है ऐ जबीन-ए-नियाज़
तू तो है नक़्श आस्ताने का

तुम तो होने लगे हो संजीदा
अब मैं आँसू नहीं बहाने का

जानें अंजाम बर्क़ या सय्याद
है तो आग़ाज़ आशियाने का

क़िस्मत-ए-इश्क़ या हो दौलत-ए-हुस्न
किस को शिकवा नहीं ज़माने का

अश्क-ए-रंगीं मिरा फ़साना है
ज़िंदगी नाम है फ़साने का

यास है इक हरा-भरा बूटा
मेरे दिल के निगार-ख़ाने का

ख़ौफ़-ए-सय्याद से लरज़ता हूँ
दिल हूँ मैं अपने आशियाने का

ज़िंदगी हारने लगी हिम्मत
अब रहा क्या है आज़माने का

गुल की ख़ातिर चमन में बस्ते हैं
और बहाना है आशियाने का

महफ़िल-ए-ग़ैर में ज़रा बच कर
मैं कहीं तुम को याद आने का

साथ तौबा लगी हुई थी 'ज़की'
और खुला दर शराब-ख़ाने का