उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aalam-e-sajda hai mera ek aalam nur ka

आलम-ए-सज्दा है मेरा एक आलम नूर का

عالم سجدہ ہے میرا ایک عالم نور کا

शायर: Damodar Thakur Zaki8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आलम-ए-सज्दा है मेरा एक आलम नूर का
सज्दा-गह पर मेरी धोका हो रहा है तूर का

एक आलम हम-नवा है साहिब-ए-मक़्दूर का
साथ देता है कहाँ कोई किसी मजबूर का

शिद्दत-ए-एहसास-ए-तन्हाई की हैं हमदर्दियाँ
दर्द बढ़ जाता है अक्सर रात को रंजूर का

तीर ने नापी हैं शायद ज़ख़्म की गहराइयाँ
इल्म बेचारे को क्या है सदमा-ए-मस्तूर का

शम्अ रौशन है कहाँ इस का पता चलता नहीं
पर नज़र को है यक़ीं मौजूदगी-ए-नूर का

हैं कभी नज़रें तमन्ना पर कभी उम्मीद पर
या'नी हसरत-नाक आलम है दिल-ए-मजबूर का

तुझ में और तेरे तसव्वुर में ज़रा सा फ़र्क़ है
एक मंज़र पास का है एक मंज़र दूर का

सरफ़राज़ी-ओ-नवाज़िश का सुना है सिर्फ़ नाम
ऐ 'ज़की' उन से तो रिश्ता भी नहीं है दूर का