उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo roz-o-shab mohabbat karne wale

वो रोज़-ओ-शब मोहब्बत करने वाले

وہ روز و شب محبت کرنے والے

शायर: Mahboob Mashmiri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो रोज़-ओ-शब मोहब्बत करने वाले
कहाँ हैं अब मोहब्बत करने वाले

मोहब्बत की तलब होती नहीं थी
मिले थे जब मोहब्बत करने वाले

फ़सादी भी कहीं से सीख लेते
न थे मकतब मोहब्बत करने वाले

सभी फूलों की ख़ुशबू मुनफ़रिद है
सभी मज़हब मोहब्बत करने वाले

जहाँ भी हैं रहें हर-दम सलामत
मिरे या-रब मोहब्बत करने वाले

तिरा 'महबूब' भी होगा वहीं पर
जिधर हैं सब मोहब्बत करने वाले