उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo log jinko hayat apni ghamon mein Dubi hui milegi

वो लोग जिन को हयात अपनी ग़मों में डूबी हुई मिलेगी

وہ لوگ جن کو حیات اپنی غموں میں ڈوبی ہوئی ملے گی

शायर: Qais Rampuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो लोग जिन को हयात अपनी ग़मों में डूबी हुई मिलेगी
अगर मिरे साथ साथ आएँ तो इक नई ज़िंदगी मिलेगी

उन्हीं को हाँ बस उन्हीं को ऐ 'क़ैस' मंज़िल-ए-ज़िंदगी मलेगी
मुसीबतों के हुजूम में भी लबों पे जिन के हँसी मलेगी

क़फ़स की तारीक ख़ल्वतों पर हैं मो'तरिज़ क्यूँ ये अहल-ए-दुनिया
चमन में भी आशियाँ जलेंगे तो फिर कहीं रौशनी मिलेगी

मैं तेरी आँखों के आसरे पर ही मय-कदे से उठा था लेकिन
ये क्या ख़बर थी कि तेरी आँखों से और भी तिश्नगी मिलेगी

अगर उजालों की है तमन्ना न बुझने पाए चराग़ दिल का
कि दिल में जब रौशनी न होगी तो हर तरफ़ तीरगी मिलेगी

क़सम है तुम को मिरे मुक़द्दर की यूँ सवारो न अपनी ज़ुल्फ़ें
तुम्हीं अगर उलझनें न दोगे तो फिर कहाँ ज़िंदगी मिलेगी

ये लोग जो ख़ंदा-ज़न हैं मुझ पर इन्हें कुछ इस की ख़बर नहीं है
कि मेरी रूदाद-गुम-रही से ज़माने को रहबरी मिलेगी