उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo KHwab ya KHayal hai main jaan lun to kuchh kahun

वो ख़्वाब या ख़याल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

وہ خواب یا خیال ہے میں جان لوں تو کچھ کہوں

शायर: Iftikhar Shahid Abu Saad10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो ख़्वाब या ख़याल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ
जो रंज-ए-माह-ओ-साल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

अभी मुझे ख़बर नहीं मैं किस लिए उदास हूँ
जो हुज़्न है मलाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

ग़ुबार-ए-आरज़ू छटे तो फिर कोई ख़बर मिले
ये हिज्र है विसाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

फ़क़ीह-ए-शहर एक जाम पी के देख लूँ ज़रा
हराम या हलाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

कई दिनों से एक शे'र भी नहीं कहा गया
उरूज या ज़वाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

गो ज़ख़्म सिल गए मगर कसक तो और बढ़ गई
ये कैसा इंदिमाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

कली चटकने दीजिए अभी न मुझ से पूछिए
ये ज़र्द है कि लाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

रदीफ़ और क़ाफ़िए निभा दिए गए मगर
ग़ज़ल भी ला-ज़वाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

अभी तो मेरे पास था अभी ये दिल किधर गया
ये ज़ुल्फ़ है कि जाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ

हमारे साथ यार लोग फिर से हाथ कर गए
या अब के तेरी चाल है मैं जान लूँ तो कुछ कहूँ