उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bahr-e-be-kanar tu

बहर-ए-बे-कनार तू

بحر بے کنار تو

शायर: Iftikhar Shahid Abu Saad11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बहर-ए-बे-कनार तू
मैं ज़रा सी आब-जू

अक्स है ख़जिल ख़जिल
आइने के रू-ब-रू

दोस्तों ने देख ली
कर के मेरी जुस्तुजू

अब कई दिनों से हूँ
मैं ही अपने दू-बदू

फूल चुन रहा था मैं
तुम थे महव-ए-गुफ़्तुगू

तेरे दर को छोड़ के
फिर रहे हैं कू-ब-कू

तज़्किरा हो चाँद का
या तुम्हारी गुफ़्तुगू

आइने से बात कर
आ कभी तू रू-ब-रू

देख ख़ाक-ज़ादों की
ला-मकाँ की आरज़ू

चले चलो यही तो है
आबलों की आबरू

तेरे दर पे फूल भी
माँगते हैं रंग-ओ-बू