उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere honTon ki KHair mangi hai

तेरे होंटों की ख़ैर माँगी है

تیرے ہونٹوں کی خیر مانگی ہے

शायर: Iftikhar Shahid Abu Saad8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे होंटों की ख़ैर माँगी है
या'नी फूलों की ख़ैर माँगी है

ये ख़बर है कि बादलों ने अभी
तेरी ज़ुल्फ़ों की ख़ैर माँगी है

सारे बुझते हुए चराग़ों ने
जलती आँखों की ख़ैर माँगी है

कुछ फ़क़ीरों ने दान के बदले
कज-कुलाहों की ख़ैर माँगी है

डोलते तख़्त उड़ते ताजों ने
बादशाहों की ख़ैर माँगी है

तेरी बिंदिया ने तेरे झुमकों ने
चाँद तारों की ख़ैर माँगी है

दौड़ती हाँपती ख़िज़ाओं ने
लाला-ज़ारों की ख़ैर माँगी है

एक सस्सी के ज़ख़्मी पैरों ने
रेगज़ारों की ख़ैर माँगी है