उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum sad-hazar bar tujhe dekhte rahe

हम सद-हज़ार बार तुझे देखते रहे

ہم صد ہزار بار تجھے دیکھتے رہے

शायर: Iftikhar Shahid Abu Saad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम सद-हज़ार बार तुझे देखते रहे
था शौक़ बे-महार तुझे देखते रहे

कुछ ने तो मुस्कुरा के कहा अलविदा'अ मगर
कुछ लोग अश्क-बार तुझे देखते रहे

फिर यूँ हुआ कि सारे बदन पर निकल पड़ीं
आँखें कई हज़ार तुझे देखते रहे

दीवार-ए-जाँ से नक़्श तो तहलील हो गए
मिज़्गाँ के आर-पार तुझे देखते रहे

ऐ हुस्न-ए-ला-ज़वाल तू आया जो बाम पर
सदियों के बे-क़रार तुझे देखते रहे

दीदा-वरान-ए-शौक़ न आँखें झपक सके
लम्हों का क्या शुमार तुझे देखते रहे