उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jo bolen to baat jati hai

वो जो बोलें तो बात जाती है

وہ جو بولیں تو بات جاتی ہے

शायर: Dagh Dehlvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जो बोलें तो बात जाती है
चुप रहूँ मैं तो रात जाती है

साथ हूरों के है शहीद तिरा
क्या अदम को बरात जाती है

मय के पीने से कर तो लूँ तौबा
आरज़ू-ए-नजात जाती है

दिल-लगी का मज़ा जब आता है
हस्ती-ए-बे-सबात जाती है

ख़ूब आता है लुत्फ़-ए-आज़ादी
जब ये क़ैद-ए-हयात जाती है

क्या करूँ 'दाग़' वस्ल में शिकवा
बात कहने में रात जाती है