उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jo apne the wahi ho gae harjai bhi

वो जो अपने थे वही हो गए हरजाई भी

وہ جو اپنے تھے وہی ہو گئے ہرجائی بھی

शायर: Aabid Jafri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जो अपने थे वही हो गए हरजाई भी
बात पेशानी पे लिक्खी हुई पेश आई भी

दिल तो पहले ही था महसूर-ए-ग़म-ए-तन्हाई
उस पे धरना दिए बैठी है ये पुरवाई भी

जिस तरफ़ रुख़ हो हवा का ये बरसती है वहीं
अब्र की तरह से होती है शनासाई भी

दिल को रहती भी है अब महफ़िल-ए-याराँ की तलाश
और तबीअत है कि उस बज़्म में घबराई भी