उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jitni KHud-numai kar raha hai

वो जितनी ख़ुद-नुमाई कर रहा है

وہ جتنی خود نمائی کر رہا ہے

शायर: Naeem Akhtar Khadimi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जितनी ख़ुद-नुमाई कर रहा है
ख़ुद अपनी जग-हँसाई कर रहा है

ज़रा सा जोश क्या दरिया में आया
समुंदर की बुराई कर रहा है

ज़रा हम ने ज़बाँ क्या बंद कर ली
ज़माना लब-कुशाई कर रहा है