उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo hasin ghaDi wo sunahra pal nahin bhulta

वो हसीं घड़ी वो सुनहरा पल नहीं भूलता

وہ حسیں گھڑی وہ سنہرا پل نہیں بھولتا

शायर: Qamar Malal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो हसीं घड़ी वो सुनहरा पल नहीं भूलता
जो बिताया था तिरे साथ कल नहीं भूलता

कहाँ चोट आई थी गिर के याद नहीं मगर
वो किसी का कहना ज़रा सँभल नहीं भूलता

तुझे कह दिया जो पता चला मुझे 'इश्क़ है
जिसे 'इल्म हो वो कभी 'अमल नहीं भूलता

मैं ये कैसे मान लूँ मुझ को उस ने भुला दिया
कि मिरी कही जो कोई ग़ज़ल नहीं भूलता

उसे कैसे याद न आए तू ज़रा सोच तो
कि 'मलाल' जिस से तिरा बदल नहीं भूलता