उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apnon ke sath jab koi hota hai hadisa

अपनों के साथ जब कोई होता है हादिसा

اپنوں کے ساتھ جب کوئی ہوتا ہے حادثہ

शायर: Qamar Malal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनों के साथ जब कोई होता है हादिसा
सीने में नोक-ए-तीर चुभोता है हादिसा

ताज़ा लहू से करता है पोशाक पहले तर
आँचल फिर आँसुओं से भिगोता है हादिसा

उस की बस इक हुनर में महारत है बे-मिसाल
दुख की लड़ी में अश्क पिरोता है हादिसा

बे-एहतियाती करती है ख़ूब उस की परवरिश
ग़फ़लत की नर्म गोद में सोता है हादिसा

बार-ए-ग़म-ए-अजल से हों जब लोग ना-तवाँ
लाशों का बोझ आप ही ढोता है हादिसा

कोई 'क़मर-मलाल' नई बात तो नहीं
ख़ूनी सड़क पे रोज़ ही होता है हादिसा