उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard hai ranj hai kulfat hai alam hai gham hai

दर्द है रंज है कुल्फ़त है अलम है ग़म है

درد ہے رنج ہے کلفت ہے الم ہے غم ہے

शायर: Qamar Malal5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द है रंज है कुल्फ़त है अलम है ग़म है
न ख़ुदा साथ न हमराह सनम है ग़म है

दर-ब-दर मुझ को ज़माने में लिए फिरता है
ये जो पैवस्ता मिरे साथ शिकम है ग़म है

राहत-ए-ग़म से रखा जिस ने सदा आसूदा
इन दिनों वो भी तो माइल-ब-करम है ग़म है

अब तो ताऊस ही अव्वल है सिनाँ आख़िर है
दौर-ए-हाज़िर में ये तक़दीर-ए-उमम है ग़म है

अहल-ए-दरबार से बेज़ार था इक तू ही 'मलाल'
अब तिरा सर भी वहाँ सुनते हैं ख़म है ग़म है