उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo aa ke baiThe the jis waqt aashiyane mein

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में

وہ آ کے بیٹھے تھے جس وقت آشیانے میں

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में
अमीर झाँक रहे थे ग़रीब-ख़ाने में

हज़ार क़ाफ़िले गुज़रे हैं सामने से मगर
मैं रह गया हूँ तुम्हें देखने दिखाने में

तमाम 'उम्र बिछड़ने से ख़ौफ़ खाया मगर
ज़रा सी देर लगी अस्थियाँ बहाने में

हमारे दिल को सुकून आ गया है जब से मियाँ
मची हुई है 'अजब हड़बड़ी ज़माने में

ख़ुदा के वास्ते चेहरा सँभाल कर रखना
लगा हुआ है कोई आइना बनाने में