उर्दू शायरी · ग़ज़ल

warna kya aab-o-hawa chiz hai kaisa mausam

वर्ना क्या आब-ओ-हवा चीज़ है कैसा मौसम

ورنہ کیا آب و ہوا چیز ہے کیسا موسم

शायर: Idris Babar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वर्ना क्या आब-ओ-हवा चीज़ है कैसा मौसम
तेरे आने से हुआ शहर में अच्छा मौसम

ये मह-ओ-मेहर इज़ाफ़ी हैं तिरे सर की क़सम
वक़्त बतलाती हैं आँखें तिरी चेहरा मौसम

धूप में छाँव कहीं मौज में तूफ़ान कहीं
जैसा ऐ दोस्त तिरा मूड है वैसा मौसम

रंग-ओ-बू रखते हैं सब फूल फल अपनी अपनी
चश्म-ओ-अबरू से अलग आरिज़-ओ-लब का मौसम

इस क़दर हुस्न अचानक मिरा दिल तोड़ न दे
एक तो प्यारा है तू इस पे ये प्यारा मौसम

न वबा के कोई दिन रात न तन्हाई के साल
तेरे आते ही बदल जाता है सारा मौसम