उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waraq haTa ke haqiqat mein zindagi samjhe

वरक़ हटा के हक़ीक़त में ज़िंदगी समझे

ورق ہٹا کے حقیقت میں زندگی سمجھے

शायर: Yasir Abul Aas6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वरक़ हटा के हक़ीक़त में ज़िंदगी समझे
कहाँ मिले कोई ऐसा जो बेबसी समझे

जो हादसात-ए-ज़माना से हो शिकस्ता-दिल
हमारी रूह के हर कर्ब को वही समझे

सुकूँ न आए उसे एक पल भी मेरे बग़ैर
मिरा 'अज़ीज़ हमेशा मिरी कमी समझे

हमेशा सूद-ओ-ज़ियाँ का ही जो हिसाब करे
वो शख़्स क्या ही मोहब्बत की चाशनी समझे

सुख़न-शनास तो हैं मेरे शहर में लेकिन
मुझे तलाश है उस की जो ख़ामुशी समझे

हम अहल-ए-दिल हैं हमें फ़लसफ़े से क्या मतलब
हमारे साथ वो बैठे जो शा'इरी समझे