उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mausam-e-barg-o-bar ki baaten

मौसम-ए-बर्ग-ओ-बार की बातें

موسم برگ و بار کی باتیں

शायर: Yasir Abul Aas8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मौसम-ए-बर्ग-ओ-बार की बातें
हम न जानें बहार की बातें

ऐ हवा तू ही अब बता मुझ को
उस गली उस दयार की बातें

हम से होती नहीं किसी सूरत
ज़ख़्म के इश्तिहार की बातें

तेरे मुँह से 'अजीब लगती हैं
जाने क्यों प्यार-व्यार की बातें

किस ने छेड़ी कि दिल मचल उट्ठा
उस हसीं यादगार की बातें

ख़्वाब में भी सुनाई देती हैं
तीरा-ए-रोज़गार की बातें

लौटना जब मुहाल है उस का
क्यों करें इंतिज़ार की बातें

कैसे भूलूँ कि याद आती हैं
'यासिर' उस ग़म-गुसार की बातें