उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab tamasha-e-ahl-e-jahan dekhiye

सब तमाशा-ए-अहल-ए-जहाँ देखिए

سب تماشائے اہل جہاں دیکھیے

शायर: Yasir Abul Aas9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब तमाशा-ए-अहल-ए-जहाँ देखिए
और ख़ामोश रह कर गुज़र कीजिए

कट ही जाएगा ये ज़िंदगी का सफ़र
इस के बारे में इतना भी मत सोचिए

क़ल्ब के नाम पर सब ने रक्खा है संग
अब किसी से शिकायत भी क्या कीजिए

ये जो दिखता है चेहरे पे सब झूट है
जो नहीं दिख रहा है उसे देखिए

चारागर इतना एहसान बनता तो है
मुझ को अपनी भी कोई ख़बर दीजिए

तितलियों को भी होश अब न आए कभी
अपनी ख़ुशबू का ऐसा असर छोड़िए

सामने सब के हँसने में है फ़ाएदा
हाँ मगर आप तन्हाई में रोइए

अब ज़मीं चीख़ती है लहू के लिए
सरफ़रोशी का कोई हुनर सीखिए

बाँटते रहिए फूल अपने हिस्से का और
अपने दामन को काँटों से भर लीजिए