उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHush na ho chand charaghon ko bujhane wale

ख़ुश न हो चंद चराग़ों को बुझाने वाले

خوش نہ ہو چند چراغوں کو بجھانے والے

शायर: Yasir Abul Aas9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुश न हो चंद चराग़ों को बुझाने वाले
लाख आएँगे अभी शम' जलाने वाले

तू सितमगर है सितमगर ही कहेंगे हम तो
गरचे कहते हों मसीहा ये ज़माने वाले

तू मुझे ख़ाक ज़माने से मिटा पाएगा
तुझ से गुज़रे हैं बहुत मुझ को मिटाने वाले

सब पे हाकिम की इता'अत है ज़रूरी लेकिन
उन के दर पर नहीं हम सर को झुकाने वाले

कितनी पस्ती में हैं सब तुझ पे भरोसा कर के
अब कि हम चाल में तेरी नहीं आने वाले

इस हुकूमत के नशे में न हो फ़िर'औन के मिस्ल
ग़र्क़ होते हैं ख़ुदा ख़ुद को बताने वाले

उन के चेहरे की हँसी सिर्फ़ दिखावा है कि ख़ुद
ख़ूब रोते हैं अकेले में हँसाने वाले

'उम्र भर हो के क़दम-बोस गिराते आँसू
लौट आते जो कभी छोड़ के जाने वाले

रोज़ देते हैं नया ज़ख़्म ये कह कर 'यासिर'
हैं बहुत ज़ख़्म पे मरहम को लगाने वाले