उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aarzu hai ki zaKHm khaen hum

आरज़ू है कि ज़ख़्म खाएँ हम

آرزو ہے کہ زخم کھائیں ہم

शायर: Yasir Abul Aas9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आरज़ू है कि ज़ख़्म खाएँ हम
और फिर उस पे मुस्कुराएँ हम

ज़ुल्मत-ए-शब में रौशनी के लिए
ख़ून-ए-दिल से दिया जलाएँ हम

ज़िंदगी तू ही अब बता हम को
नाज़ कितने तिरे उठाएँ हम

पूछते हो जो हाल-ए-दिल आ कर
कोई हालत हो तो बताएँ हम

कौन कितना हमारा मुख़्लिस है
क्यों न इक रोज़ आज़माएँ हम

चार ही ग़म हैं और कहते हैं
शिद्दत-ए-ग़म से मर न जाएँ हम

इक तुम्हारी ख़ुशी की ख़ातिर क्या
ख़्वाहिशों पर छुरी चलाएँ हम

अब ये मुमकिन नहीं किसी सूरत
शे'र-गोई से बाज़ आएँ हम

लुत्फ़ ग़ज़लों में कुछ नहीं 'यासिर'
आओ कुछ और गुनगुनाएँ हम