उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wajud-e-KHak se bahar nikal dega wo

वजूद-ए-ख़ाक से बाहर निकाल देगा वो

وجود خاک سے باہر نکال دے گا وہ

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वजूद-ए-ख़ाक से बाहर निकाल देगा वो
मुझे भी अपने सरापे में ढाल देगा वो

मैं जानता हूँ मोहब्बत में हारने के बा'द
सभी के सामने मेरी मिसाल देगा वो

शिकोह-ए-बख़्त पे मसरूर शख़्स को आख़िर
किसी फ़क़ीर के क़दमों में डाल देगा वो

मैं उस के हक़ में यहाँ आख़िरी दुआ-गो हूँ
मुझे भी अपनी सफ़ों से निकाल देगा वो

कोई तो शक्ल है मौजूद मुझ में भी 'शहज़ाद'
मैं संग हूँ तो मुझे ख़द्द-ओ-ख़ाल देगा वो