उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hairat hai ki jo zulm se taqdir banaen

हैरत है कि जो ज़ुल्म से तक़दीर बनाएँ

حیرت ہے کہ جو ظلم سے تقدیر بنائیں

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हैरत है कि जो ज़ुल्म से तक़दीर बनाएँ
कुछ लोग उन्हें साहब-ए-तौक़ीर बनाएँ

इक ख़्वाब में रखें कोई गुज़रा हुआ लम्हा
इक ख़्वाब से आइंदा की ता'बीर बनाएँ

पत्थर पे करें नक़्श तिरे हिज्र का क़िस्सा
पानी पे तिरे वस्ल की तस्वीर बनाएँ

शायद किसी ज़िंदान से निकले नहीं अब तक
ये लोग जो काग़ज़ पे भी ज़ंजीर बनाएँ

इक बार अगर बाब-ए-सुख़न हम पे भी खुल जाए
उस शख़्स को भी मो'तक़िद-ए-'मीर' बनाएँ