उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamesha jitne wala kabhi to haara bhi ho

हमेशा जीतने वाला कभी तो हारा भी हो

ہمیشہ جیتنے والا کبھی تو ہارا بھی ہو

शायर: Qamar Raza Shahzad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमेशा जीतने वाला कभी तो हारा भी हो
मोहब्बतों में कोई फ़ैसला हमारा भी हो

मैं इस किनारे पे बैठा हूँ और सोचता हूँ
मिरी गिरफ़्त में दरिया का वो किनारा भी हो

ये शहर छोड़ना मुश्किल तो है मगर सर-ए-दस्त
किसी को मेरा ठहरना यहाँ गवारा भी हो

मुझे क़ुबूल नहीं तोहमत-ए-दुआ और वो
ये चाहता है किसी ने उसे पुकारा भी हो

मैं आफ़्ताब नहीं हूँ मगर कभी 'शहज़ाद'
मिरे मदार में उस शख़्स का सितारा भी हो